
केंचुआ खाद
Vermicompostजैविक पदार्थ से तैयार पोषण स्रोत, जो मिट्टी की संरचना और जीवांश सुधारने में सहायक है।
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BIOKHETI ORGANIC • SOIL-FIRST FARMING
BioKheti Organic किसानों के लिए जिम्मेदार जैविक कृषि जानकारी और उपयोगी कृषि-इनपुट विकसित कर रहा है। हमारा पहला उत्पाद—वर्मी कम्पोस्ट—जल्द उपलब्ध होगा।

PREMIUM VERMICOMPOST
अच्छी तरह तैयार वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में जैविक पदार्थ जोड़ने, उसकी संरचना सुधारने और नमी सँभालने की क्षमता को सहारा देने में उपयोगी हो सकती है। सही मात्रा मिट्टी, फसल और स्थानीय परिस्थिति के अनुसार तय होनी चाहिए।
पैकिंग, मूल्य और बिक्री की तारीख आवश्यक परीक्षण एवं अनुपालन पूरा होने के बाद प्रकाशित होगी।
हमने BIOKHETI क्यों बनाई?
लगातार और असंतुलित रासायनिक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक शक्ति प्रभावित हो सकती है और किसान की लागत बढ़ सकती है। इसी चिंता से BioKheti Organic की शुरुआत हुई।
हमारा संकल्प किसानों को डराना नहीं, बल्कि सही जानकारी, खेत की परिस्थिति और विशेषज्ञ सलाह के आधार पर सुरक्षित, व्यावहारिक और चरणबद्ध बदलाव की राह दिखाना है।
“जीवंत मिट्टी से ही समृद्ध किसान और स्वस्थ भविष्य बनेगा।”
BIOKHETI उत्पाद श्रृंखला
वर्मी कम्पोस्ट से शुरुआत करते हुए हम उपयोगी जैविक कृषि-इनपुट विकसित कर रहे हैं। हर उत्पाद की वास्तविक उपलब्धता, उपयोग-विधि और लेबल जानकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट रूप से प्रकाशित की जाएगी।

जैविक पदार्थ से तैयार पोषण स्रोत, जो मिट्टी की संरचना और जीवांश सुधारने में सहायक है।
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नीम-आधारित पारंपरिक जैविक घोल, प्राकृतिक खेती में फसल प्रबंधन के लिए उपयोग होता है।
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विभिन्न वनस्पतियों से बनाया जाने वाला पारंपरिक घोल, प्राकृतिक खेती की समग्र पद्धति का हिस्सा।
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नीम से प्राप्त वनस्पति अर्क—जिम्मेदार और निर्देशानुसार उपयोग के लिए विकसित किया जा रहा है।
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नीम के बीज से प्राप्त प्राकृतिक तेल, कृषि में सुविचारित उपयोग के लिए जाना जाता है।
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लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर आधारित जैव उर्वरक श्रेणी; अंतिम विवरण परीक्षण और स्वीकृति के बाद।
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कृषि में उपयोगी जैविक फंगस-आधारित इनपुट; प्रयोग अनुमोदित लेबल निर्देशों के अनुसार।
उत्पाद समझें →फसल प्रबंधन रूपरेखा
हर खेत की मिट्टी, मौसम और फसल अलग होती है। इसलिए निर्णय खेत के रिकॉर्ड, परीक्षण और स्थानीय परिस्थिति के अनुसार होना चाहिए।
मिट्टी परीक्षण, पिछली फसल और खेत की दशा का रिकॉर्ड रखें।
अच्छी तरह तैयार कम्पोस्ट और फसल-अवशेष प्रबंधन अपनाएँ।
रासायनिक इनपुट अचानक छोड़ने के बजाय विशेषज्ञ सलाह से चरणबद्ध योजना बनाएँ।
मान्य जैविक विकल्पों का सही समय, सही मात्रा और लेबल अनुसार उपयोग करें।
नमी, मल्चिंग और फसल की अवस्था के अनुसार संतुलित प्रबंधन करें।
लागत, उपज, मिट्टी और कीट स्थिति की तुलना करके अगला निर्णय लें।
जैविक पद्धतियों के संभावित फायदे
व्यावहारिक कृषि जानकारी
किसान अपने अनुभव के साथ आवश्यक विषय खोलकर उपयोगी जानकारी देख सकते हैं। सामग्री स्पष्ट, फसल-केंद्रित और जिम्मेदार निर्णय में सहायता के लिए प्रस्तुत है।
मिट्टी की जाँच कराएँ, पानी का स्रोत समझें, पिछली फसल और अभी इस्तेमाल हो रहे इनपुट लिखें। खेत की सही स्थिति जाने बिना कोई एक नुस्खा सभी खेतों पर लागू नहीं होता।
फसल अवशेष जलाने से बचें। अच्छी तरह पकी कम्पोस्ट, हरी खाद और स्थानीय जैविक पदार्थ को मिट्टी की जरूरत के अनुसार शामिल करें।
स्वस्थ, उपयुक्त बीज चुनें। बीज उपचार के लिए केवल मान्य उत्पाद और उनके लेबल पर दी मात्रा अपनाएँ। रोगग्रस्त बीज अलग रखें।
फसल की अवस्था देखकर पोषण दें। कम्पोस्ट, जैव उर्वरक और अन्य स्रोतों का चुनाव मिट्टी परीक्षण एवं कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें।
अधिक या कम पानी दोनों नुकसान कर सकते हैं। नमी देखकर सिंचाई करें और उपलब्ध फसल-अवशेष से मल्चिंग पर विचार करें।
हर सप्ताह खेत देखें, प्रभावित पौधों की पहचान करें और रिकॉर्ड रखें। पहले रोकथाम, जैव विविधता और मान्य जैविक विकल्पों को प्राथमिकता दें।
सही परिपक्वता पर कटाई, सुरक्षित नमी, साफ भंडारण और बैचवार रिकॉर्ड से गुणवत्ता बचाने में मदद मिलती है।
बीज, मजदूरी, इनपुट, पानी, उत्पादन और बिक्री लिखें। एक मौसम के बजाय कई फसलों के परिणाम देखकर निर्णय लें।
जैविक खेती का परिणाम मिट्टी, मौसम, फसल और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। किसी भी उत्पाद का उपयोग उसके अनुमोदित लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें।
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